विचार: मार्क्सवाद से सवर्णवाद की ओर कन्हैया कुमार- तपेंद्र प्रसाद शाक्य, पूर्व मंत्री & पूर्व आईएएस

 सवर्ण कुल मिलाकर चाहे सेकुलर या कम्युनल हो, समाजवादी-मार्क्सवादी हो, लेनिनवादी हो, माओवादी हो, प्रगतिवादी हो, तरक़्क़ीपसन्द हो, विज्ञानवादी हो या कोई वादी हो-सभी एक हैं और सभी सवर्ण वर्चस्व के पोषक हैं और हिन्दू धर्म और हिंदू संस्कृति के नाम ब्राह्मण धर्म और ब्राह्मण संस्कृति के पोषक हैं। सर्वधर्म समभाव और धार्मिक सद्भाव और एकता के नाम पर वर्णवादी धार्मिक सांस्कृतिक एजेंडा की स्वीकृति चाहते हैं। सामंती पूंजीवादी और सवर्ण हेजेमोनी की राजनीति के पोषक हैं। इसीलिए कांग्रेस और BJP भी एक ही है। ब्राह्मण डामिनेटेड कम्युनिस्ट पार्टियां भी एक हैं तो क्या ये पिछड़े एक जगह एकत्र होकर राजनीति नहीं कर सकते।

सभी जातियाँ अपने जाति के नेता को महान बताकर उनके अहंकार को और बढ़ा रही है और सभी जाति में कुछ नेता अपने को एक मात्र अपने जाति का नेता स्वयंभू नेता घोषित करने का काम कर रहे हैं और पीछे पीछे उनके अनुयायी भी उनको उस जाति का एकमात्र महान नेता घोषित कर रहे हैं। ऐसे में पूरे पिछड़े वर्ग में हर जाति का एक नेता और एक पार्टी है। यह अलग बात है कि उनके प्रतिद्वंदिता में उसी जाति में तमाम पार्टियां बनती जा रही है और एक ही राजनीतिक घर में कई पार्टियां बन रही है।

 समाजवादी पार्टी, अपना दल, लोजपा, तमिलनाडु में करुणानिधि के परिवार, हरियाणा में चौधरी देवीलाल के परिवार में ही कई पार्टियां बन गई और पिछड़ों में अब तक लगभग 2 हज़ार से अधिक पार्टियां बन गई हैं। 

जैसे सवर्ण इस देश में कुल मिलाकर ब्राह्मणी संस्कृति, सामंतवाद और पूंजीवाद स्थापित करने और बाक़ी सभी को शिक्षा सत्ता समृद्धि से वंचित करने के लिए कांग्रेस BJP में एकजुट हैं वैसे ही सारे पिछड़ों को अब एक निश्चित सांस्कृतिक विचारधारा अपनानी होगी, जिसमें मानववाद, समता, समानता, सामाजिक न्याय, राजनीतिक न्याय, आर्थिक न्याय और वैज्ञानिक सोच की धारा हो, मैत्री, बंधुता और करूणा हो। इन मानवतावादी समतावादी सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर राजनीति करें। केंद्र की सत्ता पर क़ाबिज़ हो और सत्ता पर आकर अपने व्यापक हित में, देश राष्ट्र और यहाँ की आम जनता के व्यापक हित में शिक्षा रोज़गार संस्कृति न्याय की योजनाएं बनाएँ और उसे क्रियान्वित करें।

 इस एजेंडे को लेकर एक लोकतांत्रिक पार्टी विकसित हो, जिसमें एक व्यक्ति, एक परिवार और एक क्षेत्र तथा एक जाति का प्रभुत्व न हो। हर स्तर पर नेतृत्व बदलता रहे तभी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सवर्णवाद, सामंतवाद, पूंजीवाद, शोषण, अन्याय का मुक़ाबला कर पाएंगे अन्यथा ये आपको शोषण करते रहेंगे और आप सिर्फ़ आलोचना समीक्षा करते रहेंगे, आँसू बहाते रोते चिल्लाते रहेंगे, अपने जाति की अपने परिवार की पार्टी बनाकर अहंकार में दूसरे को कोसते और गरियाते रहेंगे, कुछ होने वाला नहीं है।

~तपेंद्र प्रसाद शाक्य, पूर्व मंत्री, उ.प्र. सरकार & पूर्व आईएएस

संस्थापक, सम्यक पार्टी, भारत

Post a Comment

0 Comments