पूरे भारत में दीवाली का पर्व मनाया जाता है, इसे दीपावली या दीपोत्सव भी कहा जाता है, आज हम समझेंगे कि दीवाली किस प्रकार से भारत का महापर्व है. दीपावली मनाये जाने के कई कारण है लेकिन सबसे पहले हम दीपावली मनाए जाने के ऐतिहासिक कारणों को देखेंगे.
दीवाली मनाए जाने का सबसे प्रमुख कारण भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा हुआ है. कार्तिक की अमावस्या को ही भगवान महावीर स्वामी का महापरिनिर्वाण (महाप्रयाण) हुआ था. पूरे देश के जैन मंदिरों में आज के दिन दीपावली मनाई जाती है. मंदिरों को 2 दिन पहले से ही सजा दिया जाता है. गुजरात और राजस्थान में तो जैनों के साथ-साथ वहां का पूरा व्यापारी वर्ग भगवान महावीर के महाप्रयाण दिवस पर दीपावली मनाता है.
दीपावली मनाए जाने का दूसरा ऐतिहासिक कारण भगवान बुद्ध से जुड़ा हुआ है. आज ही के दिन राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ज्ञान प्राप्ति के पश्चात बुद्ध होकर पहली बार अपने गृह नगर कपिलवस्तु पहुंचे थे. जिसके उपलक्ष में पूरे कपिलवस्तु में दीए जलाए गए थे. अब इस दिन पूरे देश के बौद्ध विहारों एवं मंदिरों में दीपोत्सप मनाया जाता है.
दीपावली उत्सव मनाए जाने का तीसरा कारण ब्राह्मण माइथोलॉजी से जुड़ा हुआ है. ब्राह्मण मॉइथोलॉजी के प्रमुख महाकाव्य तुलसीकृत रामचरितमानस के अनुसार आज ही के दिन भगवान श्रीराम जी लंका पर विजय प्राप्त करने के पश्चात पहली बार अपनी राजधानी अयोध्या पधारे थे. जिसके उपलक्ष में सभी अयोध्यावासियों ने दीए जलाकर उनका स्वागत किया था. देश के सभी वैष्णव मंदिरों में, शैव मंदिरों में दीपावली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.
यह दीपावली आपके जीवन में नव उमंग उत्साह लेकर आए इसी कामना के साथ सभी देशवासियों को दीपोत्सप की हार्दिक बधाई.
~संतोष शाक्य
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