अछूत, कमजोर, आदिवासी, शूद्र, पिछड़ी जातियों का इकठ्ठा होकर अपने हक मांगना जातिवाद नहीं होता ~संतोष शाक्य

बहुत से लोगों का कहना है कि मल्लाह का बेटा अपनी जाति को इकट्ठा करके अपने अधिकार मांग रहा है तो वह जातिवादी है. कुम्हार का बेटा अपने अधिकार मांग रहा है तो वह भी जातिवादी है. धानुक, चूहड़ा का बेटा अपने हक मांग रहा है तो वह जातिवादी है.

ऐसे लोग थोड़ा समाजशास्त्र पढ़ें और समझने की कोशिश करें कि जब कमजोर वर्ग समूह बनाकर अत्याचार या सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ता है तो उसे जातिवाद नहीं कहते बल्कि उस वर्ग को क्रांतिकारी कहा जाता है.

इसलिये समझो कि जब मैं ऐसे समाजिक, शैक्षणिक रूप से बहुत पिछड़ चुके वर्गों के लिए लिखता हूं तो मैं जातिवाद नहीं करता बल्कि मैं क्रांति करता हूं. मैं नहीं कहता कि कमजोर वर्गों के पक्ष में लिखने के लिए आप मुझे क्रांतिकारी मानो पर मेरे प्रिय साथियों कम से कम मुझे जातिवादी तो मत कहो.

~संतोष शाक्य

Post a Comment

0 Comments