कविता- जब भी समण लोग सम्राट हुए। ~संतोष शाक्य

हमेशा हृदय से विराट हुए 

जब भी समण लोग सम्राट हुए


प्रसेनदि हुए, कालाशोक हुए

अजातशत्रु,  बिंबिसार हुए


न्याय का एक अपार छंद हुए 

हम महान सम्राट महापदमनंद हुए


लोकतंत्र का हम ही विचार हुए 

हमारे गणराज्य कई हजार हुए


धम्म ध्वजा पर हम ही सवार हुए 

सिद्धार्थ, वर्धमान से राजकुमार हुए


विश्व का हम ही अप्रीतम शौर्य हुए

हमी चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य हुए


हम ही विश्व का एकमात्र आलोक हुए 

हमी विश्व विजेता सम्राट अशोक हुए


भावनाओं से कभी भी न शुष्क हुए 

हम हुए तो फिर सम्राट कनिष्क हुए


हमसे नालंदा से संस्थान प्रदीप्त हुए

हम चंद्रगुप्त कुमारगुप्त समुद्रगुप्त हुए


संगम पर महादान कर विराट हुए

हमी हर्षवर्धन से महान सम्राट हुए


हमी कबीर रैदास नानक से फकीर हुए 

हमी शिवाजी बन के महान वीर हुए


किसान और वंचितों के साथ खड़े

हम फुले बन विचारों की धार हुए


हमी माता सावित्री फुले का संकल्प हुए

नारी शिक्षा का एकमात्र विकल्प हुए


बदलने को तत्पर हम ही समाज हुए 

हमी छत्रपति शाहूजी महाराज हुए


त्याग समर्पण में हमेशा अपार हुए

हमी हुए अंबेडकर, हमी पेरियार हुए


हमी शहीद बिरसा और भगत सिंह हुए

हमी शहीद बाबू जगदेव प्रसाद हुए


न्याय के लिए हमेशा हमारे विवाद हुए 

हमी शहीद मास्टर जगदीश प्रसाद हुए


हम ही अर्जक रामस्वरूप, जगदेव हुए

हमी सोनेलाल हमी मान्यवर कांशीराम हुए


हमी तोड़ने वाले पाखंड की जंजीर हुए 

हम नागवंशी पेरियार ललई सिंह अहीर हुए


हमी क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह हुए 

हमी राष्ट्र के प्रतीक चार सिंह हुए


सिंधु घाटी के हमी पाषाण हुए

जंबूद्वीप के हमी प्राण हुए, जंबूद्वीप का हमी प्राण हुए।


जय जंबूद्वीप, जय समण भारत


~संतोष शाक्य


Santosh Shakya©️copyright


फोटो- फोटो में दिया गया सिक्का महान सम्राट कनिष्क का सिक्का है, जो कि 2000 वर्ष पुराना है।

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