भारत के बाहर रह रहे भारतवंशी या भारत में जन्में वे लोग जो भारत से बाहर किसी और देश में स्थाई रूप से बस गए हैं उन्हें प्रवासी भारतीय कहा जाता है। प्रवासी भारतीय आज भले ही भारत से बाहर रह रहे हो, लेकिन उनका जुड़ाव अपने पूर्वजों के माध्यम से भारत से हमेशा से ही रहा है। इसी अपनत्व और जुड़ाव को और भी मजबूत करने के लिए भारत सरकार 09 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाती है। यह दिन इसलिए विशेष है क्योंकि इसीदिन 1915 को महात्मा गांधी हमेशा के लिए दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। इस वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस का 17वां सम्मेलन इंदौर (मध्यप्रदेश) में आयोजित किया जा रहा है।
प्रवासी भारतीय हमेशा से ही भारत के विश्वसनीय साथी के रूप में जाने जाते रहे हैं। भारत के केवल सांस्कृतिक, आर्थिक ही नहीं कूटनीतिक स्तर पर भी सहयोगी रहे हैं इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार प्रवासी भारतीयों को भारत के प्रगति में अपना भागीदार बनाना चाहती है। प्रवासी उद्यमियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहन दे रही है। उन्हें भारत और भारतीय संस्कृति को जानने और समझने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। साथ ही अपने पूर्वजों के पत्रिक गांव या शहर को ढूंढने में मदद कर रही है ताकि भारत से उनका जुड़ाव और भी बेहतर हो।
इस वर्ष सम्मेलन के मुख्य अथिति गयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफ़ान अली और सूरीनाम के राष्ट्रपति माननीय चंद्रिका प्रसाद संतोखी विशेष सम्मानित अतिथि हैं। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा "आजादी का अमृत महोत्सव" - "भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रवासी भारतीयों का योगदान" विषय पर डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा चुनिंदा भारतीय प्रवासी सदस्यों को उनकी उपलब्धियों के लिए 'प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार 2023' प्रदान किया जायेगा।
~अनूप सिंह कुशवाहा, शोध छात्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज

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